जहाँ से गिर गए हो, फिर वहीं लौट आओ

जहाँ से गिर गए हो, फिर वहीं लौट आओ

हे पिता परमेश्वर, धन्यवाद करते हैं आज के वचन के लिए। आज के वचन के द्वारा हर एक के जीवन में आशीष आए। यीशु के अद्भुत नाम में, आमीन।

भाइयों और बहनों, अंत के दिनों में लोगों का प्रेम ठंडा पड़ जाएगा, जैसा कि यीशु ने कहा:
“और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठंडा हो जाएगा।”
— मत्ती 24:12

आमीन।

भाइयों और बहनों, प्रभु यीशु मसीह अपने दिव्य रूप में यूहन्ना को दिखाई दिए और उन्होंने 7 कलिसियाओं के दूतों को पत्र लिखने को कहा। यीशु ने चर्चों से, पास्टर्स से, विश्वासियों से और सेवकों से कहा:

“मुझे तेरे विरुद्ध यह कहना है कि तूने अपना पहला प्रेम छोड़ दिया है।”
— प्रकाशितवाक्य 2:4

कौन सा पहला प्रेम?
याद कीजिए, जिस दिन आपने यीशु को पाया था, उन्हें अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण किया था — वह दिन कैसा था? वह पल कैसा था?

जहाँ से गिर गए हो, फिर वहीं लौट आओ

वह दिन हमारी जिंदगी का सबसे अच्छा दिन होता है। ऐसा लगता है जैसे हमारे पाँव ज़मीन पर नहीं हैं, मानो हम हवा में उड़ रहे हों। हमारा मन और आत्मा आनंद और खुशी से भर जाते हैं। ऐसी खुशी संसार की किसी भी चीज़ से नहीं मिल सकती।

उस दिन हर भाई और बहन खुशी से नाचता, गाता और प्रभु यीशु मसीह के प्रेम से भर जाता है। हम कहते हैं:
“प्रभु, अब तो बस आपके लिए ही जीऊँगा।”
“आई लव यू जीसस।”

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, वह जोश और वह प्रेम धीरे-धीरे कम होने लगता है।
पहले की तरह वचन पढ़ने और सुनने में मन नहीं लगता।
पहले की तरह आराधना नहीं करते।
पहले की तरह घुटनों पर बैठकर प्रार्थना नहीं करते।
न संगति करते हैं, न चर्च जाने का मन करता है।

सवाल यह है — ऐसा क्यों होता है?
प्रभु के लिए वह प्रेम और जोश कहाँ चला जाता है?

भाइयों और बहनों, यीशु तो हमसे प्रेम करते ही हैं। इसका प्रमाण उन्होंने कलवरी के क्रूस पर अपनी जान देकर दिया। उन्होंने हमारे लिए दुःख उठाया, मरे, गाड़े गए और तीसरे दिन जी उठे ताकि हमें अनंत जीवन मिले।

लेकिन हम यीशु से कितना प्रेम करते हैं?

आज के वचन का अर्थ यही है कि जिस प्रकार पहले दिन हमने यीशु को अपना मुक्तिदाता मानकर अनंत आनंद पाया था, उसी प्रेम में अंत तक बने रहें।

प्रकाशितवाक्य 2:4-5 का यही अर्थ है कि हम अपने पहले दिन को, उन पलों को और उस पहले प्रेम को भूल गए हैं। अब हमारे अंदर वह प्रेम की आग नहीं रही।

क्या हमें यीशु को और अधिक जानने की भूख नहीं बढ़ानी चाहिए थी?
लेकिन प्रभु के प्रेम की भूख की जगह संसार और संसार की बातों ने ले ली। इसलिए अब हमारे पास प्रभु के लिए समय नहीं रहता।

जब हमें किसी चीज़ की ज़रूरत होती थी, तब हम दिन-रात प्रार्थना करते थे, बार-बार चर्च जाते थे, संगति में जाते थे और परमेश्वर के वचन को पढ़ते थे। लेकिन जैसे ही हमारी प्रार्थना का उत्तर मिल गया, हम अपने आप को धर्मी समझने लगे।

हमने अपनी धार्मिकता तो बना ली, लेकिन प्रभु यीशु मसीह के साथ अपने रिश्ते को गहराई में नहीं जाने दिया।

प्रभु इस वचन के द्वारा कहते हैं:
“याद करो कि पहले दिन जैसे बाकी दिन क्यों नहीं रहे?”

जब तुम मेरे पास आए थे, पूरे तन, मन और आत्मा से आए थे, फिर पीछे क्यों मुड़ गए?
तुम्हारा एक पैर संसार में और दूसरा मेरे घर में क्यों है?

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम उन दुखों को भूल जाते हैं जिनसे प्रभु ने हमें छुड़ाया था।

भाइयों और बहनों, हमें प्रभु का प्रेम तो याद रहता है, लेकिन हम यीशु को वैसा प्रेम नहीं करते जैसा करना चाहिए।

जिस तरह हमें हर पल यीशु का प्रेम चाहिए, उसी तरह यीशु को भी हमारा प्रेम चाहिए।

पहली आज्ञा क्या है?
“तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे दिल, सारे प्राण, सारी आत्मा और सारी शक्ति से प्रेम रखना।”

परमेश्वर से प्रेम करना मतलब उसकी आज्ञाओं को मानना।
परमेश्वर की आज्ञा तोड़ना पाप है।

अपने आप से पूछिए — हम परमेश्वर से कितना प्रेम करते हैं?

लोग संसार के प्रेम के लिए अपनी जान देने को तैयार हो जाते हैं, लेकिन प्रभु के लिए कितने लोग तैयार हैं?

आज समय है अपने मन को जाँचने का।
अपने मन को संसार से हटाकर पूरी तरह प्रभु की ओर लगा लें।

शायद कल यह मौका न मिले, इसलिए आज इस अवसर को हाथ से न जाने दें।

प्रभु कहते हैं, यदि तुम ऐसा नहीं करोगे तो मैं तुम्हारी दीवट हटा दूँगा, जो स्वर्ग में उस दिन से रखी गई है जिस दिन तुमने यीशु को अपने जीवन में ग्रहण किया था।

फिर मृत्यु के बाद कहाँ जाओगे?

भाइयों और बहनों, यह अंत का समय है। यदि आज रात यीशु आ जाएँ तो क्या होगा?

सोचिए!
जो काम हमें दिए गए हैं, उनका हिसाब परमेश्वर न्याय के दिन अवश्य लेगा।

प्रभु कहते हैं:
“जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलिसियाओं से क्या कहता है। जो जय पाए, उसे मैं जीवन के वृक्ष में से, जो परमेश्वर के स्वर्गलोक में है, फल खाने को दूँगा।”
— प्रकाशितवाक्य 2:7

आमीन।

समय थोड़ा है, इसलिए जाग जाइए।
नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुँची है।

“क्योंकि जो सोते हैं वे रात ही को सोते हैं, और जो मतवाले होते हैं वे रात ही को मतवाले होते हैं।”
— 1 थिस्सलुनीकियों 5:7

रात का अर्थ है पाप से भरा जीवन।

प्रभु ने जिस अंधकार से हमें निकाला है, उस ओर बार-बार वापस न जाएँ। अपनी आँखें यीशु से न हटाएँ।

आज सोचिए — मेरे जीवन में ऐसा क्या हुआ कि मैंने पहले दिन वाली खुशी खो दी? वह पहला जोश कहाँ चला गया? मैं कहाँ से गिर गया?

जहाँ से हमारा विश्वास और प्रेम कम हुआ, परमेश्वर चाहता है कि हम फिर उसी पहले प्रेम, उसी आग, उसी विश्वास और उसी आनंद से भर जाएँ।

हमारा आनंद कभी कम न हो, चाहे चारों ओर कितने भी दुख क्यों न हों। विश्वास रखिए, प्रभु हमें संभालता है।

भाइयों और बहनों, आज ही पश्चाताप करें।
अपने सारे पापों और गलतियों के लिए परमेश्वर से क्षमा माँगें और एक बार फिर नए सिरे से प्रभु यीशु के साथ जीवन की शुरुआत करें।

प्रभु अपने हाथ फैलाए खड़े हैं और आपको गले लगाने के लिए हमेशा तैयार हैं।

जब तक मुँह में ज़ुबान है, जब तक साँसें हैं, तब तक पश्चाताप का मौका है।
मरने के बाद कोई अवसर नहीं होगा।

फैसला आपके हाथ में है।

आज के वचन के द्वारा परमेश्वर हम सभी को आशीष दे।
यीशु के नाम में, आमीन।

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